Students motivational Stories हिन्दी में पढ़े।

Motivational stories for students in Hindi प्रेरणादायक कहानियाँ

कुछ छात्रों में कुछ नई चीजें सीखने और नए विचारों को पता लगाने के लिए अंदर से एक मोटिवेशन होता है। वे उनके आसपास के सफल व्यक्तियों को देखकर भी वह उनसे प्रेरणा लेते हैं और आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। इसलिए यहाँ पर हमने Motivational stories for students in Hindi दिया है।

कुछ ऐसे छात्र भी होते हैं जो सेल्फ मोटिवेटेड होते हैं। उन्हें अपने लक्ष्य और गोल के बारे में पता होता है इसलिए वह अपने लक्ष्य पर ध्यान रखते हुए मेहनत करते हैं। ऐसे भी छात्र होते हैं जो अपने माता-पिता और टीचर को देखकर प्रेरणा लेते हैं और उन से सीखते हैं।

चलिए आज हम कुछ ऐसे ही सीखने वाली कहानियों को पढ़ते हैं और देखते हैं कि हम इन से क्या सीख सकते हैं। क्या हम इन सीख को अपने जीवन में उतार सकते हैं।

यहां पर हम कुछ प्रेरक Motivational stories for students पर एक नजर डालें जो छात्रों को कड़ी मेहनत करने और सफल जीवन जीने के लिए नीव रखने में मदद करती है।

Motivational stories for students in Hindi

खुद को महत्व दे

एक स्पीकर ने जनता को $20 दिखा कर अपना सेमिनार शुरू किया। उन लोगों से पूछा, डॉलर दिखाते हुए कि यह कौन चाहता है? यह देख कर कोई आश्चर्य नहीं हुआ उन सभी ने अपने हाथ उठा दिए।

वे चाहते तो $20 को भी दे सकते थे। लेकिन उन्होंने वह $20 ना देते हुए उस कागज के पैसे को नीचे गिरा दिया। उन्होंने उस नोट को उठाया और वही सवाल फिर से पूछा आपमें से इसे कौन चाहता है।

फिर से सभी ने हाथ खड़े कर दिए उस पैसे को पाने के लिए। तो फिर से स्पीकर ने उस पैसे को जमीन पर गिरा दिया और नोट अभी गंदा हो चुका था। तो फिर से उन्होंने सभी से वही सवाल किया है कि इस नोट को कौन चाहता है।

वहां जमा हुए लोगों ने फिर से उस पैसे को लेने के लिए दिलचस्पी दिखाई या देखने के बावजूद कितना गंदा था। उन्होंने जनता से कहा इस पैसे से मैंने जो कुछ भी किया फिर भी आप सभी इस पैसे को प्राप्त करना चाहते हो।

स्पीकर ने समझाते हुए कहा कि आप मेरे पक्ष में सिर्फ इसलिए गए मैंने जो कुछ भी किया उसके बावजूद पैसे का मूल्य आपके लिए घटा नहीं। मैंने इस पैसे को बार-बार नीचे गिराया और गंदा किया पर फिर भी आप इस पैसे को लेने के लिए तैयार थे। आखिर ऐसा क्यों कि आप इस पैसे को इतना महत्व दे रहे हैं?

तब स्पीकर ने बोला कि इसी तरह हमारी जिंदगी में भी काई दर्दनाक स्थितियां, असफलताए आती रहती हैं जिसके कारण हम अपने आप को महत्त्व देना बंद कर देते हैं। जिस प्रकार हम एक कागज के नोट को महत्वपूर्ण महत्व देते हैं उसी प्रकार हमें अपने आपको महत्व देना चाहिए।

आपको खुद पर विश्वास रखना चाहिए success के लिए कड़ी से कड़ी मेहनत करनी चाहिए। जीवन में अनेक असफलताओं या बाधाओं के बावजूद खुद को महत्व दें। इन असफलताओं के कारण अपने आपको नीचा ना देखें।

जब आप स्वयं की नजरों में नीचे गिर जाते हैं तो आप दुनिया की नजरों में भी नीचे गिर जाते हैं।
इसलिए हमेशा याद रखें स्वयं की नजरों में कभी ना गिरे जब आप स्वयं की नजरों में ऊंचे होंगे तब लोग आपको ऊंची नजर से देखेंगे।

इस छोटी सी कहानी से हमने देखा कि खुद को महत्व देना कितना जरूरी है। हम सब दूसरों को महत्व देते रहते हैं और खुद को महत्व देना भूल जाते हैं।

Motivational stories for students in Hindi

परीक्षा की तैयारी

2 छात्र थे। वे दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। उनका नाम रमेश और श्याम था। कुछ महीनों बाद उनकी एग्जाम आने वाली थी इसलिए उन्हें अपने परीक्षा के लिए तैयारी करनी थी। तब उन्हें अपने एग्जाम के टाइम टेबल बना कर एग्जाम की अच्छी तैयारी करने को सोचा। लेकिन किसी परेशानियों की वजह से वे दोनों एक साथ पढ़ाई ना कर सके। अबे दोनों अपने-अपने घर पर पढ़ने लगे।

रमेश दिन भर पढ़ाई करता रहता। श्याम दिन में 3 से 4 घंटे पढ़ता। exam देने के लिए दोनों ने खूब मेहनत की और अपनी तरफ से पूरी कोशिश की वे अपना पूरा पाठ्यक्रम समय के अनुसार पूरा कर सकें। अब एग्जाम आने ही वाली थी। लेकिन रमेश का कुछ पाठ बाकी था। तो रमेश ने जल्दबाजी में सोचा कि अभी ज्यादा समय तो है नहीं तो थोड़ा बहुत पढ़ लेता हूं।

अगले दिन परीक्षार्थी दोनों वर्ग में गए और परीक्षा दी। कुछ दिनों बाद उनकी परीक्षा खत्म हो गई। अब वक्त था परिणाम आने का। इधर रमेश बहुत ही चिंतित था कि मेरा रिजल्ट क्या होगा? लेकिन उधर श्याम बिल्कुल भी चिंता में नहीं था खुश था मेरा परिणाम आने वाला है।

श्याम को इस बात की चिंता नहीं थी कि मेरा परिणाम क्या होगा। सोचा अगर कोई कमी हुई होगी तो उसे मैं अगली परीक्षा में पूरी कर दूंगा।

जब रिजल्ट आया तब देखा गया की रमेश को श्याम से कम अंक मिले। तभी रमेश ने श्याम से पूछा ऐसी कौन सी पढ़ाई कर ली कम समय में जो तुम्हारे इतने अच्छे परिणाम आए।

तभी श्याम ने रमेश को समझाते हुए बताया कि मैं दिन में 3 से 4 घंटे ही पढ़ाई के लिए मेहनत करता था। रमेश ने बोला, बाकी सारे टाइम तुम क्या करते थे, उस समय जो भी मैंने पढ़ा है उसका रिवीजन करता था। थोड़ा समय आराम कर लेता जिस से मेरा दिमाग और भी अच्छा हो जाता।

मैं पढ़ते समय कभी भी एग्जाम की टेंशन नहीं लेता पढ़ने पर फोकस करता हूं। और जो भी पढ़ता हूं प्रयास करता हूं उसे याद करने की , अच्छी तरह समझने की। जब कोई भी चीज आपको एक बार में अच्छी तरह से समझ में आ जाएगी तो याद करना आसान हो जाता है।

कभी भी मैं एक साथ सभी विषयों की पढ़ाई नहीं करता हूं। जब मुझे लगता है कि अभी मेरा मूड बहुत ही अच्छा है तो मैं सबसे कठिन विषयों को चुनता हूं। क्योंकि अभी अगर मेरा मूड अच्छा है और मैं कठिन विषयों को चुनूंगा तो भी मेरा मन उसे पढ़ने की कोशिश करेगा।

लेकिन सभी के लिए समान नहीं होता किसी को अच्छे मूड में अपने फेवरेट विषय को पढ़ना ज्यादा अच्छा लगता है लेकिन किसी को अपने अच्छे मूड में खराब विषयों को भी पढ़ना अच्छा लगता होगा।

तो यहां पर आप पर निर्भर है कि आप कौन सा विषय पढ़ना पसंद करते हैं। जो सब्जेक्ट आपकी फेवरेट होते हैं आप उन्हें किसी भी समय पढ़ सकते हैं लेकिन जो आपके फेवरेट नहीं होते आप उन्हें सही समय पर ही पढ़ सकते हैं ऐसा मेरा मानना है।

विषय का नोट्स बनाता हूं। जिससे मुझे अगली बार पढ़ने में परेशानी नहीं होती है। फिर से मुझे पूरा chapter पढ़ने की जरूरत नहीं है। मैं उस नोट को तीन से चार बार रिवाइज कर लेता हूं। जिससे मुझे आसानी से समझ में आ जाता है।

नोट मेरे लिए बहुत ही मददगार साबित होती है। एग्जाम के कुछ ही दिन बाकी होते हैं तो मैं इन्हीं नोट्स को पढ़ता हूं। और सब कुछ आसानी से याद हो जाता है इन नोट को पढ़ने के बाद।

पढ़ाई के साथ साथ में अपने स्वास्थ्य का भी ख्याल रखता हूं। सुबह समय से उठ जाता हूं और कुछ एक्सरसाइज कर लेता हूं। कभी-कभी मेडिटेशन भी कर लेता हूं दिन में जिससे मेरा मूड और भी फ्रेश हो जाता है। जिससे पढ़ने में और भी अधिक मन लगने लगता है।

रमेश ने श्याम से बोला अगली बार मैं भी तुम्हारी तरह अपनी परीक्षा की तैयारी करूंगा और मुझे विश्वास है मैं अगली बार अच्छे अंक प्राप्त करूंगा.

Motivational stories for students in Hindi

मेहनती बालक

एक लड़का था जो एक गांव में रहता था। उसका गांव शहर से बहुत ही ज्यादा दूर था। अगर किसी को शहर जाना हो तो 2 से 3 घंटे लग जाते थे। उस गांव में कोई भी स्कूल नहीं था।

गांव के बच्चे  पास के दूसरे गांव में  पढ़ाई  करने के लिए जाते थे। उनके गांव में कोई सड़क नहीं थी। और ना ही कोई सुख सुविधाएं थी जिससे बच्चों को आसानी हो सके स्कूल तक पहुंचने के लिए। बच्चों को प्रतिदिन चलकर अपने स्कूल तक जाना होता था।

ज्यादातर छोटे बच्चे थे वह स्कूल जाना पसंद ही नहीं करते थे क्योंकि स्कूल बहुत दूर था। और जब वे चल चल के इतनी दूर जाते हैं तो वे थक जाते। उसी गांव में महेश नाम का एक लड़का रहता था। उस लड़के को पढ़ना लिखना बहुत ही अच्छा लगता था।

महेश  प्रतिदिन अपनी पाठशाला जाता और अपनी पढ़ाई अच्छे से करता। महेश के परिवार की स्थिति इतनी भी अच्छी नहीं थी।उसके पिता एक किसान थे और माता घर का काम करती थी। पूरे परिवार का खर्चा उसके पिता को ही उठाना पड़ता था।

एक दिन अचानक  उस गांव में बाढ़ आ गई  इस वजह से उस गांव की सारी फसलें बर्बाद हो गई। महेश के पिता ने जो भी खेतों में अनाज उग आए थे  वे सभी अनाज  खराब हो गए अब क्या .. अब तो इस बार उन्हें भूखे ही  रह कर अपना गुजारा करना था।

लेकिन महेश के पिता बहुत ही मेहनती थे। वह कभी नहीं चाहते कि उनका परिवार दुखी हो। वह दिन रात मेहनत करते रहते हैं।  लेकिन इस बार बाढ़ आने की वजह से उनकी सारी फसल बर्बाद हो गई। तभी महेश के पिता ने सोचा शहर जाकर कुछ कमाई कर अपने परिवार खर्च निकाल सकूं।

महेश के पिता ने गांव छोड़ कर शहर में जाने का फैसला किया। जब शहर में आए तब वे बहुत ही अकेले थे। शुरु शुरु में तो उनके पास कोई काम धंधा नहीं था। तब उन्होंने किसी दुकान पर काम करना शुरू कर दिया। उस दुकान का मालिक उन्हें कुछ पैसे देता  जिससे वे अपना खर्चा चलाते और जो बाकी पैसा बचता वह गांव भेज देते। महेश का पूरा परिवार गांव में ही रहता था लेकिन उसके पिता शहर में रहते थे।

  महेश गांव में अपने दादा दादी के साथ रहता था। अचानक से एक दिन उसके दादाजी की तबीयत बहुत ही ज्यादा बिगड़ जाती है।  आस-पास में कोई अस्पताल भी नहीं था कि उन्हें ले जाकर वहां पर भर्ती करा जाए। महेश परिवार में अकेला था और उसी के ऊपर वह सारी जिम्मेदारी थी। क्योंकि उसके पिता शहर में रहते थे।

महेश बहुत ही ज्यादा घबरा गया जब उसने देखा कि उसके दादा जी का तबीयत खराब हो गया है। अब वह क्या करता अकेला इस घर में अभी कोई बड़ा भी नहीं है। महेश ने फिर अपने पास वाले गांव से किसी डॉक्टर को बुला लाया अपने दादाजी के इलाज के लिए। तभी डॉक्टर ने कहा इन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवाना होगा। क्योंकि इनकी तबीयत बहुत ही ज्यादा खराब है।

तभी महेश ने अपने पिता को सूचित किया कि दादाजी की तबीयत बहुत ही ज्यादा खराब है जल्द से जल्द गांव वापस आ जाइए।  महेश के पिता ने कहा ठीक है बेटा मैं जल्दी आने की कोशिश करता हूं। लेकिन अब क्या अभी तो समय भी बहुत ही कम बचा था अगर उनको अस्पताल में सही समय पर भर्ती ना कराया गया तो कुछ भी हो सकता है।

एक-दो दिन बीत गए तबीयत थोड़ी अच्छी थी । लेकिन अचानक से रात में उन को हार्ट अटैक आ गया। जब महेश के दादाजी को हार्ट अटैक आया तभी महेश ने सोचा अब तो इन्हें हॉस्पिटल में ले जाना जरूरी हो गया है। महेश अपने दादा जी को बहुत ही चाहता था। उसे अपने दादाजी की बहुत ही चिंता थी और वह हर रोज उनकी सेवा करता था।

किसी प्रकार उसने गाड़ी की व्यवस्था कर उन्हें हॉस्पिटल ले जाने की तैयारी की। हॉस्पिटल तक पहुंचने में भी उन्हें 2 से 3 घंटे तो लग ही जाते। और दादा जी की तबीयत ज्यादा खराब हो रही थी। जब तक वह अपने दादा जी को लेकर हॉस्पिटल पहुँचता। तब तक तो रस्ते में ही उनके दादा जी की मृत्यु हो गई।

महेश उस समय बहुत ही दुखी हुआ। अभी उसने ठान लिया कि अब तो मैं अपने गांव में एक हॉस्पिटल बनवाकर कर ही रहूंगा।  आज हॉस्पिटल सही समय पर ना पहुंचने की वजह से मेरे दादा जी की मृत्यु हो गई। महेश ने दृढ़ संकल्प लिया और डॉक्टर बनने का सोचा। महेश  अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने गांव में ही पूरी की। आगे की पढ़ाई करने के लिए वह शहर आ गया। महेश बहुत ही मेहनत करने लगा अपने पढ़ाई में। अब तो बस  महेश का एक ही सपना था अपने गांव में एक हॉस्पिटल बनाने का।

  सपने को पूरा करने के लिए महेश दिन-रात पढ़ाई करने लगा।  क्योंकि उसे पता था अगर उसे आगे बढ़ना है तो उसे पढ़ना ही  पड़ेगा। उसके पास अपना लक्ष्य था। और उसे अपने लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत तो करनी ही थी।

जिंदगी में कुछ बड़ा हासिल करने के लिए  कुछ बड़ा करना होता ही है। महेश ने अपनी पढ़ाई पूरी की अब वह एक डॉक्टर बन गया था। डॉक्टर बनने के बाद उसे कई सारे ऑफर मिलने लगे हॉस्पिटल में काम करने के लिए।

 लेकिन महेश तो अपने गांव जाकर वहां पर अपना हॉस्पिटल खोलना चाहता था। इसलिए  शहर में ना रहने का फैसला कर अपने गांव में जाकर अपने गांव के लोगों की सेवा करना ही उचित समझा।

 महेश अब अपने गांव वापस चला गया और अपने गांव जाकर एक बहुत ही शानदार हॉस्पिटल बनवाया। गांव के सभी लोग खुश हो गए अब गांव में कोई इलाज ना होने की वजह से परेशान नहीं होगा। आज महेश का सपना पूरा हो गया। महेश को इस बात की खुशी थी की उसने अपने गांव के लिए कुछ किया।

आज भी बहुत से ऐसे गांव है जहां पर हॉस्पिटल, विद्यालय, सड़क आदि  सुविधाएं मौजूद नहीं है। आज भी वहां के लोगों को काफी तकलीफ सहनी पड़ती है। अगर शहर में रहने वाले लोग अपने गांव का थोड़ा-थोड़ा विकास करना शुरू कर दें। तो शायद गांव की   रौनक ही बदल जाए।

 अगर हमने अपने गांव की मदद नहीं की तो कोई सरकार आकर हमारी मदद नहीं करेगा। हमारी भी तो हमारे गांव के प्रति कोई जिम्मेदारी होती है। एक जागरूक नागरिक होने के नाते हम सभी को गांव की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए ।

आज हम शहरों में कितनी सुविधाओं के साथ रहते हैं लेकिन गांव में जरूरी  सुविधाएं  ही मौजूद  नहीं है। आज गांव के किसान कितनी मेहनत करते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें कोई फायदा नहीं मिलता। बड़े-बड़े व्यापारी कम दामों में किसानों से अनाज खरीद लेते हैं, और उसी अनाज को वे हमें  महंगे में बेचते हैं। इससे उन किसानों का ज्यादा फायदा नहीं हो पाता।

इस कहानी में हमने देखा किस प्रकार महेश ने अपनी मेहनत से गांव की रौनक को बदल कर अपने गांव में ही हॉस्पिटल बनवाया।

Conclusion: Motivational stories for students in Hindi

हमेशा कहानियां छात्रों के लिए पसंदीदा ही रहती हैं । उन्हें कहानियां सुनना, पढ़ना बहुत ही अच्छा लगता है। कहानियां पढ़ने से मिली सीख उन्हें आगे बढ़ने में हेल्प करती है।

कुछ छात्र को नैतिक कहानियां बहुत ही अच्छी लगती हैं। कई छात्रों को बायोग्राफी पढ़ना पसंद होता है। कई को तो इनसाइक्लोपीडिया पढ़ना बहुत ही अच्छा लगता है।

कहानियां हर एक छात्र के जीवन का एक हिस्सा होती है। वे उन कहानियों से बहुत कुछ सीखते हैं। कहानियों से सीखना बहुत आसान होता है।

छात्र कहानियां सुनते हैं अपने दिमाग में उसकी एक छवि बना लेते हैं जिससे वह कहानियां उन्हें आसानी से याद हो जाती हैं।कहानियों को सुनना और उसकी imagination करना छात्रों को बहुत ही पसंद है।

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