life poem

Hindi poem on life | Kavita on life in Hindi | Hindi poems on life inspiration

Hindi poem on life.

काश जिंदगी सचमुच किताब होती 

पढ़ सकता मैं कि आगे क्या होगा?

क्या पाऊंगा मैं और क्या दिल खोएगा?

कब थोड़ी खुशी मिलेगी कब  दिल रोयेगा?

काश जिंदगी सचमुच किताब होती,

फाड़ सकता मैं उन लम्हों को

जिन्होने मुझे रुलाया है..

जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी

यादों ने मुझे हंसाया है..

हिसाब तो लगा पाता कितना 

खोया और कितना पाया है?

काश जिंदगी सचमुच किताब होती,

वक्त से आंखें चुराकर पीछे चला जाता..

टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाता

कुछ पल के लिए मैं भी मुस्कुराता,

काश जिंदगी सचमुच किताब होती।

Hindi poems on life inspiration

मम्मी की गोद और पापा के कंधे

ना पैसे की सोच और

ना ही लाइफ के फंडे,

ना कल की चिंता और,

ना ही फ्यूचर के सपने,

लेकिन अब कल की है फिक्र

और अधूरे हैं सपने,

पीछे मुड़कर देखा तो

बहुत दूर थे वो अपने, मंजिलों को

ढूंढते ढूंढते कहां खो गए हम

क्या सच में इतने बड़े हो गए हम।

Hindi poem on zindagi

हारना तब आवश्यक हो जाता है

जब लड़ाई “अपनों” से हो!

और जीतना तब आवश्यक हो जाता है

जब लड़ाई “अपने आप” से हो!!

मंजिलें मिले ये तो मुकद्दर की बात है

हम कोशिश भी ना करें यह तो गलत बात है

किसी ने बर्फ से पूछा कि,

आप इतनी ठंडी क्यों है?

बर्फ ने बड़ा अच्छा जवाब दिया

“मेरा अतीत भी पानी;

मेरा भविष्य भी पानी..”

फिर गर्मी किस बात पर रखूं।

Hindi poems on life values

घबराने से मसले हल नहीं होते

जो आज है, वह कल नहीं होते..

ध्यान रखो इस बात का जरूर

कीचड़ में सब कमल नहीं होते..

नफा पहुंचाते हैं जो जिस्म को

मीठे अक्सर वह फल नहीं होते..

जुगाड़ करना पड़ता है हमेशा

 रस्ते तो कभी सरल नहीं होते..

दर्द की सर्द हवा से बनते हैं जो 

वह ठोस कभी तरल नहीं होते..

नफरत की खाद से जो पेड़ पनपते हैं

मीठे उनके कभी फल नहीं होते..

जो आपको आपसे ज्यादा समझे

 ऐसे लोग दरअसल नहीं होते..

kavita on life in hindi

कुछ बातें तो आजमाइए,

 फिर देखिए क्या निखर कर आता है।

जिंदगी मौज से जीने के लिए है दोस्तों,

देखो आपके परेशानियों को कैसे बुखार आता है।

खुश रहा कीजिए हर हालातों में,

जीने का नजरिया तो बदलिए,

नन्ही नन्ही मुश्किलों से डर कर 

युही मुरझाया ना कीजिए।

ना हो सके हासिल,

 ऐसा तो कोई मंजर नहीं है।

कोशिश करते रहिए

 हार मान कर बैठ जाओ

 अभी उम्र ढली कहीं है?

बदलेगा दिन और समय और सोच लोगों की,

आखिरी योद्धा हो आप भी, अपने जीवन के||

Hindi Kavita on life 

चेहरे पर मुखौटे लिए हुए 

भीड़ में चल रहे हैं लोग

कौन अपना है कौन पराया 

इन्हीं सवालों का, दिल पर है बोझ।

सोचता हूं उचाई से गिरकर देखूं

शायद मुझे मेरी औकात पता चले

किस-किस के हाथ बढ़ते हैं उठाने 

जिससे मुझे अपनो का पता चले।

मुस्कुराते हुए मुखोटे अक्सर

झूठ का सहारा लेते हैं

गिरगिट की फितरत है इनकी

जब चाहे मुखौटा बदल लेते हैं।

इन मुकदमों से डरता हूं मैं अब

ना जाने छेड़ दे यह कौन सा राग

हर मुखौटे के पीछे छिपे हैं

ना जाने कितने गहरे राज।

धीरे-धीरे सीख रहा हूं, इन मुखौटो को पढ़ना

अब छुपाये नहीं छुपती, इनकी जात और औकात

क्योंकि माथे की लकीरों पे..

छिपी रहती है इनके दिल की हर बात।

Poetry on life in Hindi

नन्ही सफर को ज्यादा तैयारी नहीं लगती,

 कोई मंजिल देर तक प्यारी नहीं लगती।

एक चेहरे पर जैसे कई सौ चेहरे पहने हैं,

हमें अपनी तस्वीर भी हमारी नहीं लगती।

वह कौन है जो इतने बेपरवाह होते हैं

जिन्हें कभी तंज की चिंगारी नहीं लगती।

मुझमें सांस लेता है तुम्हारा एक हिस्सा,

तुम्हारी बेवफाई, मुझे तुम्हारी नहीं लगती।

यह कैसी अजीब शय बताओ हमें ‘वीर’,

यह जिंदगी क्यों हमें अब हमारी नहीं लगती?

poems on life inspiration in hindi

खुद में रहकर वक़्त बिताओ तो अच्छा है,

खुद का परिचय खुद से कराओ तो अच्छा है…

इस दुनिया की भीड़ में चलने से बेहतर,

खुद के साथ घूमने जाओ तो अच्छा है…

अपने घर के रोशन दीपक देख लिए अब,

खुद के अंदर दीप जलाओ तो अच्छा है…

तेरी, मेरी इसकी उसकी छोड़ो भी अब,

खुद से खुद की शक्ल मिलाओ तो अच्छा है…

बदन को महक आने में सारी उम्र काट ली,

रूह को अब अपनी महकाओ तो अच्छा है…

दुनिया भर में घूम लिए हो जी भर के अब,

वापस खुद में लौट के आओ तो अच्छा है…

तनहाई में खामोशी के साथ बैठकर,

खुद को खुद की गजल सुनाओ तो अच्छा है…

Poems on life in Hindi

तुझे नाम बनाना है, काम तो कर..

सपनों को पाना है, शाम तो कर..

हिम्मत ना हार, इन गमों को मार

इस दर्द को तू आग बना

सफलता का तू मार्ग बना।।

अभी तो दुनिया ही लानी है

लोगों को तेरे नाम की तालियां बजानी है।

अंधेरो को हराना है

नया सवेरा लाना है।।

दुनिया में अगर नाम बनाना है

फिर मुसीबतों से क्या घबराना है।।

कर कुछ ऐसा तो छा जाये

तू लोगों के दिलों में समा जाए।।

kavita on life in hindi

वह बचपन भी कितना सुहाना था;

जिसका रोज एक नया फसाना था।

कभी पापा के कंधे का;

 तो कभी मां के आंचल का सहारा था।

कभी बेफिक्रे मिट्टी के खेल का;

तो कभी दोस्तों का साथ मस्ताना था।

कभी नंगे पांव वो दौड़ का;

तो कभी पतंग ना पकड़ पाने का पछतावा था।

कभी बिन आंसू रोने का;

तो कभी बात मनवाने का बहाना था।

सच कहूं तो वह दिन ही हसीन थे;

ना कुछ छिपाना और दिल में जो आए बताना था।

Hindi poems on life inspiration

मंजिल की चाहत में घर से निकल जाता हूं

गैरों को अपना कर, अपनों से बिछड़ जाता हूं।।

कैसी हैं ये पगडंडियां कैसे हैं ये रास्ते

जाना कहां था और कहां मुड़ चला हूं।।

मंजिल की चाहत में खुद से दूर हो चला हूं

वह पापा की डांट वह मम्मी का प्यार

भाई-बहन की होती वो प्यारी सी तकरार

वो गुल्लक की खनक, वो कंचे की गोटी

वो चाट की दुकान, वो मीठी गोली

भूल गया हूं अपनों के प्यार भरी होली

जाना कहां था और कहां मुड़ चला हूं।।

मंजिल की चाहत में खुद से दूर हो चला हूं

कर पुराने पलों को याद में आज रोज लेता हूं

मंजिल की चाहत में क्या-क्या खो बैठा हूं।।


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