about ganga river in hindi

About Ganga River in Hindi | गंगा नदी के बारे में महत्त्वपूर्ण बातें जाने

आज हम यहाँ पर गंगा नदी के बारे में जानेगे। गंगा नदी से जुड़े हुए महत्त्वपूर्ण बातें जाने।  

 गंगा भारत देश की सबसे पवित्र नदी में से एक है। यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदी है।  यह हमारे भारत देश के उत्तर दिशा से निकलती है। गंगा नदी हिमालय की चोटियों से निकलती हुई उत्तराखंड  से लेकर बंगाल की खाड़ी  के अंतर भूभाग को सिचती हुई आगे बढ़ती है। गंगा नदी की लंबाई  लगभग 1,560 miles (2,510 km) है।  

जब गंगा भारत के हिमालय से निकलती हुई आगे बढ़ती है तब कई छोटी-छोटी नदियां गंगा में मिल जाती हैं जैसे कि  भागीरथी, मंदाकिनी ,विष्णु गंगा  आदि  यह सभी गंगा की सहायक नदियां हैं  जो गंगा में मिल जाती है।  इस प्रकार गंगा एक विशाल रूप धारण कर लेती है।  

  इस प्रकार पहाड़ी रास्ता तय करके गंगा नदी ऋषिकेश होते हुए मैदानों का स्पर्श हरिद्वार में करती है।  हरिद्वार से होते हुए वह प्रयागराज पहुंचती है।  यहां इसका संगम यमुना नदी से होता है।

 बनारस को एक तीर्थ स्थल की तरह माना जाता है जहां पर गंगा नदी और अन्य दो नदियों से मिलती है। बनारस में गंगा, यमुना, सरस्वती यह तीनों नदियों का संगम है।  भारत देश के कई राज्यों से लोग यहां पर स्नान करने आते हैं।  यहां पर साल में एक बार कुंभ मेला लगता है।  भारत का जो बहुत ही प्रसिद्ध मेला है। 

गंगा नदी के बारे में कई मान्यताए भी है। ऐसा माना जाता है कि गंगा जी को स्वर्ग से भागीरथ जी ने धरती पर लेकर आया था। गंगा नदी को  इसलिए भागीरथी के नाम से भी जाना जाता है।

उन्होंने अपने तपो बल से गंगा जी को धरती पर आने का अनुरोध किया था। ऐसा भी हमारे पुराणों में लिखा गया है कि गंगा शिव जी की जटाओं से निकलती है।  पृथ्वी पर आकर धरती को स्वर्ग बनाने वाली गंगा को भारतवासी अपनी मां की तरह पूजते हैं और प्यार करते हैं। 

भारत की राष्ट्रीय नदी  गंगा जल  ही नहीं  अपितु भारत और हिंदी साहित्य की  मानवीय चेतना को भी बहुत ही ज्यादा प्रभावित करती है।  ऋग्वेद एवं अनेक पुराणों में गंगा को पापनाशिनी, मोक्ष प्रदायनी, एवं महानदी कहा गया है।

गंगा के अनेक रूप अनेक कथाएं हैं। पुराणों ने गंगा को मोक्षदायिनी बताया गया  है जो लोगो को मोक्ष प्रदान करती है। स्वर्ग में गंगा को अलकनंदा, पृथ्वी पर भागीरथी या जाहन्वी तथा पाताल में अधो गंगा (पाताल गंगा) के नाम से भी जाना जाता है।

गंगा के तट पर विकसित हुए सभी धार्मिक तथा तीर्थ स्थल भारतीय सामाजिक व्यवस्था के विशेष अंग हैं।  गंगा के ऊपर बने हुए पुल, बांध और नदी  परियोजनाएं भारत के अलग अलग राज्य को बिजली, पानी और कृषि से संबंधित जरूरतों को पूरा करती है।

भारत में ज्यादातर बड़े बड़े शहर किसी न किसी नदी के किनारे पर बसे हुए है। गंगाजी कों माता के समान माना जाता है। गंगा माता सभी प्राणियों की  प्यास बुझाती है। धरती को अपने ज़ल से सिचती है। 

गंगा का पानी बहुत ही ज्यादा स्वच्छ होता है।  जब गंगा हिमालय से निकलती है तब पानी बहुत ही ज्यादा निर्मल होते हैं। साइंटिस्ट का मानना है कि गंगा के पानी में कीटाणुओं का वास नहीं होता। उनका मानना यह भी है कि  गंगा नदी के जल में  बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं,  जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं। 

हम गंगा के पानी को कई दिनों तक इकट्ठा करके अपने घर पर रख सकते हैं और उसमें कोई भी कीटाणु नहीं पनपते है। जब गंगा के पानी की रिसर्च हुई तब उसमें पता चला कि गंगा का जो जल है उसमें ऑक्सीजन ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, किसी और पानी की तुलना से।

गंगा नदी धीरे-धीरे कर बहुत ही ज्यादा प्रदूषित हो रही है। गंगा नदी के किनारे बहुत सी फैक्ट्रिया है, जो अपने फैक्ट्री के कचरे को नदी में डाल देते है।  जब  कंपनियां अपना रासायनिक कचरा नदी में डालते है तो वह जल में रहने वाले प्राणियों को बहुत ही ज्यादा खतरा पहुँचता है।   

पहले की तुलना में आज  गंगा के जल बिल्कुल अलग हो गए। गंगा आज इतनी ज्यादा स्वच्छ और निर्मल नहीं है। धार्मिक तीर्थ स्थलों पर लोग  जाकर प्लास्टिक और पूजा के बचे हुए सामानो को नदी में डाल देते है। इससे भी हमारी गंगा मैली हो रही है।  

गंगा को स्वच्छ करने का अभियान भी चलाया गया ताकि गंगा का पानी स्वच्छ हो जाये।  लेकिन इतना कुछ करने के बाद भी ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा।  लोगो को इसके लिए जागरूक करने की जरुरत है ताकि लोग स्वयं ही गन्दगी न करे।  

गंगा नदी में मछलियों तथा सांपों की अनेक अलग प्रजातियां पाई जाती हैं  तथा इसमें डॉल्फिन भी पाए जाते हैं। गंगा नदी पर्यटन, कृषि क्षेत्र और उद्योग  के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करती है।  नदी के तट पर बसे सभी शहरों को जलापूर्ति भी करती है। 

गंगा नदी जिस भी राज्य से बहती है उस राज्य में खेती भी बहुत अच्छी होती है।  उस राज्य की जमीन बहुत ही ज्यादा उपजाऊ हो जाती है।  भारत देश के इन सभी राज्यों में बहुत ही अच्छी खेती होती है क्योंकि वहां पर जल की कमी नहीं है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार,वेस्ट बंगाल आदि राज्यो से गंगा नदी बहती है।

गंगा नदी को अलग-अलग स्थानों पर  विभिन्न नामों से जाना जाता है।  जब यही गंगा बांग्लादेश में बहती है तो इसे वहां के मूल निवासी पदमा नदी के नाम से जानते है।  

 उत्तर भारत के बड़े भाग को जल प्रदान करने वाली गंगा यदि न होती तो प्राकृतिक दृष्टि से यह प्रदेश एक विशाल रेगिस्तान होता। राम की सरयू, कृष्ण की यमुना, रति देव की चम्बल, गजग्राह की सोन, नेपाल की कोसी, गण्डक तथा तिब्बत से आने वाली ब्रह्मपुत्र सभी को अपने में समेटती हुई और अलकनंदा, जाहन्वी, भागीरथी, हुगली, पदमा, मेघना आदि विभिन्न नामों से जानी जाने वाली गंगा नदी अंत में जाकर सुंदरवन के पास बंगाल की खाड़ी में समा जाती हैं। यहां पर वह सागर से जुड़ जाती है। 

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